समता आंदोलन ने मनाया 18वां स्थापना दिवस
- A 1 Rajasthani
- 30 मई 2025
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समता आंदोलन ने मनाया 18वां स्थापना दिवस
जयपुर। राजधानी जयपुर के गोविंद मार्ग स्थित गीता बजाज बाल विद्या मंदिर के गिरधर सभा भवन में समता आंदोलन की तरफ से अपना 18वां स्थापना दिवस मनाया गया। महाराणा प्रताप जयंती के अवसर पर कार्यक्रम की शुरुआत महाराणा प्रताप के चित्र पर पुष्पमाला अर्पित करके की गई। ऑपरेशन सिंदूर की सफलता पर गरिमामय माहौल में भारत माता की जयकारों के बीच कुमारी ने देशभक्ति गीत पर कलात्मक नृत्य प्रस्तुत किया। परम्परागत रूप से सभी उपस्थित लोगों ने सस्वर समता गान के साथ समारोह का शुभारंभ किया।

कार्यक्रम में स्वागत भाषण महाप्रबंधक पी.एन. शर्मा ने दिया। संस्थापक सदस्य मोहनलाल महेश्वरी ने सभी आगंतुकों का दुपट्टा ओढ़ाकर अभिनंदन किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि एयरवाईस मार्शल अशोक कुमार शर्मा ने समता आंदोलन को एक राष्ट्रवादी समतावादी आंदोलन बताते हुए इसके कार्यकलापों की प्रशंसा की। कुल 98 वर्ष के जस्टिस पानाचंद जैन ने संरक्षक के रूप में उद्बोधन देते हुए बताया कि समता आंदोलन संविधान की मर्यादाओं की चार दीवारी में चलाए जाने वाला ऐसा आंदोलन है, जो भारतीय संविधान की अक्षरशः सख्त पालना सुनिश्चित करवाने के लिए प्रयासरत है। पूर्व पुलिस महानिरीक्षक हरिप्रसाद शर्मा ने समता आंदोलन के संरक्षक के रूप में बताया कि समता आंदोलन ने पदोन्नति में जातिगत आरक्षण को बंद करवाने के लिए सर्वोच्च न्यायालय तक लड़ाई लड़कर विजय प्राप्त की। अब यह आंदोलन न्यायिक निर्णयों और संवैधानिक प्रावधानों को समतावादी दृष्टिकोण से लागू करवाने के लिए प्रयासरत है।
समता आंदोलन के राष्ट्रीय अध्यक्ष पाराशर नारायण शर्मा ने बताया कि समता आंदोलन केंद्र सरकार की जातिगत जनगणना करवाने के निर्णय का समर्थन करता है। जातिगत जनगणना से देश के वास्तविक वंचित, पिछड़े और गरीब समुदायों की पहचान आसानी से की जा सकेगी। आरक्षित वर्ग का उपवर्गीकरण वैज्ञानिक तरीके से किया जा सकेगा। क्रीमीलेयर लोगों को बाहर करने में मदद मिलेगी। आरक्षण की सीमा को 50 प्रतिशत से घटाने में मदद मिलेगी। समता आंदोलन को जातिगत जनगणना से ऐसे महत्वपूर्ण आंकड़े मिलेंगे, जिनके आधार पर भारतीय नागरिकों को तथ्यात्मक रूप से जागरुक कर पाएंगे। शर्मा ने एट्रोसिटी एक्ट के बारे में फैल रही भ्रांतियां को दूर करते हुए बताया कि एट्रोसिटी एक्ट में एफआईआर दर्ज करने के बाद 95 प्रतिशत से अधिक मुकदमों में किसी भी अभियुक्त को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है। इसके लिए उन्होंने जनता को जागरुक करते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति के खिलाफ यदि एट्रोसिटी एक्ट के अधीन मुकदमा दर्ज होता है तो वह डरे नहीं, घबराएं नहीं, छिपे नहीं, इसका सामना करें। साथ ही तत्काल किसी सामाजिक संगठन या समता आंदोलन के पदाधिकारी का सहयोग लेकर इसका दृढ़ता से मुकाबला करें।








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