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पद्मश्री रामगोपाल विजयवर्गीय संग्रहालय में स्मृति -चर्चा सत्र पर विशेष व्याख्यान"

19 दिस॰ 2025
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पद्मश्री रामगोपाल विजयवर्गीय संग्रहालय में स्मृति -चर्चा सत्र पर विशेष व्याख्यान"

आलेख: डॉ. रेनू शाही कला आचार्य, चित्रकार और कला समीक्षक, जयपुर।

बुधवार, 10 दिसंबर 2025 को जयपुर के जलमहल स्थिति पद्मश्री रामगोपाल विजयवर्गीय म्यूज़ियम में साहित्यकार कलाकार तथा जयपुर म्यूज़ियम के पूर्व उपनिदेशक स्व. मोहन लाल गुप्ता की स्मृति में एक चर्चा सत्र रखा गया था।

इस अवसर पर आर जी वी म्यूज़ियम ट्रस्ट के अध्यक्ष कमल विजयवर्गीय ने दीप प्रज्ज्वलित कर सत्र का शुभारंभ किया। सत्र में जयपुर शहर के सांस्कृतिक परिवेश पर आधारित द्विभाषिक पुस्तक "गुलाबी शहर की गुलाबी यादें" के लेखक कलाकार श्री गुप्ता जी को याद करते हुए अतिथियों ने गुलाबी शहर के सौंदर्यात्मक पक्ष को याद किया। नन्द भारद्वाज ने कहा कि गुप्ता जी का योगदान आसानी से भुलाया नहीं जा सकता। उनकी ख्याति कला और साहित्य दोनों ही क्षेत्रों में अविस्मरणीय है।

कार्यक्रम में आर. बी. गौतम, राजेंद्रमोहन शर्मा, विनोद भारद्वाज, अक्षय जगधारी, सविता मार्कण्डेय, शशि शाह ने भी इस आयोजन में विचार व्यक्त किए और कला व साहित्य के उस दौर की सराहना की जिसने जयपुर को संस्कृति का जीवंत केंद्र बनाया। कार्यक्रम का संचालन और संयोजन ख्यातनाम साहित्यकार प्रबोध कुमार गोविल ने किया। अतिथियों तथा श्रोताओं ने म्यूज़ियम में प्रदर्शित विजयवर्गीय जी साथ ही युवा कलाकारों के चित्रों का भी अवलोकन भी किया जो भविष्य में होने वाले म्यूज़ियम के विधिवत उद्घाटन की पूर्व तैयारी के लिए संगृहीत किए गए हैं।

व्याख्यान में बोलते हुए सुविख्यात साहित्यकार नन्द भारद्वाज ने कहा कि गुप्ता जी की कला और साहित्य दोनों ही तत्कालीन समय की धरोहर है जिसे आसानी से भुलाया नहीं जा सकता। विनोद भारद्वाज ने कहा कि जयपुर शहर की कला- संस्कृति का जो दौर गुप्ता जी ने अपनी युवावस्था के दौरान देखा उसके बारे में सुनना और पढ़ना भी नई पीढ़ी के लिए रोचक होगा। पूर्व आई पी एस अधिकारी अतुल माथुर ने अपने करियर में पुलिस सेवा से पूर्व के उन क्षणों को याद किया। जब वो विजयवर्गीय जी से मिलने जाते थे और उनकी सादगी की छाप मन पर लेकर आते थे।

राजेंद्र मोहन शर्मा ने गुप्ता जी के परिवार के साथ अपने विशिष्ट संबंधों को याद करते हुए उनके कार्य को सामाजिक महत्व का बताया। इसी श्रृंखला में ट्रस्ट के अध्यक्ष कमल विजयवर्गीय को युवा कलाकार रवि द्वारा स्वयं बनाया हुआ कमल जी का पोर्ट्रेट भेंट किया। इस अवसर पर समारोह के संयोजक-संचालक प्रबोध कुमार गोविल ने कहा कि कमल जी लंबे समय तक जापान में रहे हैं अतः उनके व्यक्तित्व पर बिना प्रचार के चुपचाप कार्य में लगे रहने की जापानी संस्कृति ने अपना असर डाला है। इंडो जापान डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन ने अपनी गतिविधियों से एक अच्छी पहचान बनाई है।

पुस्तक "संस्कृति के स्वर" आईफेक्स अवॉर्ड से सम्मानित स्व. मोहन लाल गुप्ता पर आयोजित इस स्मृति चर्चा के अवसर पर कला जगत और शहर के कई गणमान्य अतिथि, साहित्यकार, कलाकार आदि उपस्थित थे।

 
 
 

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