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लाख कला में द्रोपदी का इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड मे दर्ज हुआ

  • लेखक की तस्वीर: A1 Raj
    A1 Raj
  • 5 फ़र॰ 2025
  • 2 मिनट पठन

लाख कला में द्रोपती मीणा का इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड मैं दर्ज हुआ

द्रोपती मीणा राजस्थान की नहीं भारत की पहली महिला लाख आर्टिस्ट हैं और पहेली आदिवासी महिला हैं जिन्हें लाख कला में इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज हुआ है द्रौपदी मीना यह कार्य 2016 से कर रही है बच्चों की जिम्मेदारियां संभालते हुए उनके बच्चे बेटा भी डॉक्टर है और बेटी एमबीबीएस कर रही है बच्चों की जिम्मेदारियां के बाद उन्होंने अपनी कला को उड़ान दिए द्रौपदी मीना उस लाख से पेंटिंग तैयार करती है जो हमारे राजस्थान में सुहागिन महिलाएं लाख की चूड़ियां पहनती हैं इस लाख को गैस चूल्हे पर पिघल कर मोड करके पेंटिंग तैयार करती है लाख वह घर पर भी तैयार करती हैं लाख की पेंटिंग तैयार करने के लिए वह एक्रेलिक कलर ,कैनवस ,सितारे लाख की मटेरियल लेती है।

लाख कला में द्रोपदी का  इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड मे दर्ज हुआ
लाख कला में द्रोपदी का इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड मे दर्ज हुआ

द्रोपती मीणा को एन टी आर ai दिल्ली ने भी आदिवासी महिला अचीवर अवार्डसे भी सम्मानित किया है अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2023 को भारतीय लोक कला मंडल विश्व गुरु परिषद उदयपुर n भी द्रौपदी मीणा को आचार्य सम्मान से सम्मानित किया है नवंबर 2024 में समर्पण संस्था जयपुर ने भी उन्हें भूपेन हजारिका अवार्ड से सम्मानित किया गया है साधना न्यूज़ टीवी चैनल में भी उन्हें सम्मानित किया है राजस्थान असंग अवार्ड से भी द्रोपती मीणा को सम्मानित किया जा चुका है ।

द्रोपती मीणा ने आत्मानंद गुरुकुल मलाना छोड सवाई माधोपुर अपनी कला का उद्घाटन किया 2022 को तब से वह अपनी कला को पब्लिक के सामने लेकर आई है और तब से उनका यह कलl का सफर जारी है द्रौपदी मीणा का कहना है कि अपने आप पर और अपने काम की प्रति विश्वास होना चाहिए तो कामयाबी जरूर मिलती है वह शादीशुदा महिलाओं के लिए कहना चाहती हैं कि वह अपने सपनों को शादी के बाद भी पूरा करें अपने काम इमानदारी से और अपने काम के प्रति विश्वास होना चाहिए और अपने आप पर आत्मविश्वास होना चाहिए और अपने सपनों को उड़ान जरूर देनी चाहिए खुद की नाम और पहचान होनी चाहिए द्रोपती मीणा का कहना है कि परमपिता परमेश्वर गुरु माता-पिता और बड़ों के आशीर्वाद मानती है।

20 दिसंबर 2024 को उनके पापा शांत हो गए द्रोपती को 20 दिन हुए थे तब उनके पापा सपने में दिखाई दिए वह हंसते हुए मिलकर आशीर्वाद देकर गए उनके पापा को सवा महीना भी नहीं हुआ उससे पहले उन्हें इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड मिल गया इसलिए वह पापा का आशीर्वाद मानती है और यह अवार्ड अपने पापा को समर्पित करती है द्रोपदी का कहना है कि मेरे पिता लक्ष्मण स्वरूप मीणा अध्यापक थे और उन्हें के संस्कार रहे हैं उनके स्वाभिमान सिद्धांत उनकी सच्चाई आज भी वह साथ हैं भगवान को बहुत मानते थे द्रोपदी का जन्म स्थान दौसा जिले के बसवा तहसील में गांव है जावली का बाढ़ वहां की रहने वाली है और उनका ससुराल अलवर जिला में मलाना गांव है

 
 
 

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