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"राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट के लाल को आर. बी. आई. का पुरस्कार " सौजन्य : डॉ. रेणु शाही (कलाआचार्य, चित्रकार एवं कलासमीक्षक, जयपुर, राजस्थान

"राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट के लाल को आर. बी. आई. का पुरस्कार "


सौजन्य : डॉ. रेणु शाही (कलाआचार्य, चित्रकार एवं कलासमीक्षक, जयपुर, राजस्थान)


भारत के सबसे बड़े बैंक, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की स्थापना इसके 90 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में उनके द्वारा किए गये कार्यो से संबंधित विषय पर राष्ट्रीय स्तर की चित्रकला प्रतियोगिता' का आयोजन किया गया था जो आर. बी. आई. के मुख्य कार्यालय, दिल्ली में 21 से 23 अक्तूबर के बीच संपन्न हुआ.

इस प्रतियोगिता में देश से कई कला महाविद्यालयों के विद्यार्थी प्रतिभागी रहे, जिसमें गौरवशाली इतिहास लिये हुये 'राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट, जयपुर, राजस्थान के विद्यार्थी लालचंद प्रजापत ने भी भाग लिया था, जो केकड़ी जिले के भिनाय ब्लॉक में ग्राम बड़ली के निवासी है l

विजेता को पुरस्कार के रूप में एक लाख रूपये की नकद राशि और पदक तथा संस्थान को कंप्यूटर सेट और आर.बी.आई. का स्मृति चिन्ह प्रदान किया गया l

स्कूल ऑफ आर्ट के प्राचार्य डॉ. अनिल खण्डेलवाल ने इसके लिए निरंतर प्रयास किया उन्होंने बताया कि लालचंद प्रजापत ने सहायक आचार्य पंकज यादव के निर्देशन में रहकर कार्य पूर्ण किया था l

कुल इकहत्तर प्रतिभागियों में से चयनित श्रेष्ठ पंद्रह में अपना स्थान बनाकर लालचंद ने अपने राज्य और महाविद्यालय को गौरवांवित किया है l

इस अविस्मरणीय उपलब्धि पर महाविद्यालय और प्राचार्य की ओर से एक सम्मान समारोह आयोजित किया गया, जिसमें महाविद्यालय के गणमान्य शिक्षको में डॉ. आकांक्षा कौशिक, चंद्रकांता पीलवाल, डॉ. रेणु शाही, डॉ. नमिता सोनी, दीपिका शर्मा, डॉ. लक्ष्मीकांत, गिरिराज यादव, अनूप डेनियल के साथ-साथ प्रदीप सोनी, पुष्पा, रोहित, सीमा, सावित्री, राहुल ने खुशी व्यक्त करते हुए लालचंद्र को बधाई दी l

पारिवारिक जिम्मेदारी को भी निभाने में माहिर लालचंद अभी बी.वी.ए. तृतीय वर्ष चित्रकला के विद्यार्थी हैं, डॉ. रेणु ने बताया कि वह इनकी ही कक्षा के छात्र है, इनका अपना एक ग्रुप है जो पढ़ाई और काम के लिए पूरी लगन से लगे रहते है तथा निरंतर अभ्यास करते रहते है जो कि दृश्यकला के विद्यार्थियों के लिए अति आवश्यक है इसीलिए लालचंद अपनी इस सफ़लता का श्रेय अपने सहपाठियों यश सोनगरा, गार्गी कुमावत, प्रियंका मीना और माही सिंह को भी देते है l जिनके साथ रहकर इन्होंने अपने चित्र बनाने में कई प्रयोग किये हैं यह अपने पिता जीवराज प्रजापत एवं माँ गीता देवी की प्रेरणा एवं आशीर्वाद को सबसे महत्वपूर्ण बताते हुए विशेष सहयोग के लिए सभी गुरुजनों एवं इस्ट मित्रों का आभार व्यक्त करते है, जिनकी प्रेरणा और स्नेह से आज वे यह करने में सफल हो पाये है l

 
 
 

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