पुलिस और आला अधिकारियों पर महिला का बड़ा आरोप
- A1 Raj
- 10 अप्रैल 2023
- 3 मिनट पठन
*विगत 2 सालों से न्याय के लिए दर-दर भटक रही एक महिला*
*चित्रकूट थाने में दर्ज है एफ आई आर*
*चित्रकूट थाने की भाषा बोल रहे पुलिस के आला अफसर भी..?*
*पुलिस ने आरोपी को ही बना दिया गवाह*
*मोनिका गारखेल बनाम विकास सतीश शर्मा मामला*
*विकास की पत्नी लीना शर्मा, भाई हरीश शर्मा, बैंक के दो कर्मचारी और उनके पिता सतीश शर्मा को पुलिस ने नहीं बनाया पार्टी*
जयपुर । पीड़िता मोनिका गारखेल ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए बताया की मैंने चित्रकूट थाने में एफ आई आर नंबर 297/21 दिनांक 22/09/2021 को रजिस्टर्ड करवाया था, जिसमें कि 5 आरोपित है मुख्य आरोपी एवं बाकी चार का भी पूरा विवरण साक्ष्य के साथ दिया था, फिर भी मुकदमा अज्ञात के नाम से पंजीकृत किया गया। पहले आई ओ वासुदेव सिंह ने सिर्फ इस पर टाइमपास करा और जब उनकी शिकायत ऊपर की गई तो वह मुझे धमकी देने लगे। तब तक संबंधित कोर्ट में चार्जशीट पेश नहीं हुई थी, परंतु आईओ वासुदेव सिंह को चार्जशीट पेश करने की बहुत जल्दी थी। सब इंस्पेक्टर वासुदेव सिंह कविया के कई और भी मामले सामने आए हैं जिसकी वजह से उन्हें लाइन हाजिर भी किया जा चुका है।

मामला यहीं नहीं थमा मोनिका ने बताया कि 10 फरवरी 2022 को वह तत्कालीन डीजीपी एम एल लाठर के समक्ष प्रस्तुत हुई और उसके बाद उन्होंने मेरा परिवाद उस समय रवि प्रकाश मेहरडा एडीजीपी क्राइम ने सुना और आश्वासन दिया की इसकी जांच वे स्वयं करवाएंगे। मोनिका ने उन्हें इस फाइनेंसियल स्कैम का पूरा विवरण दिया उन्हें उनके दफ्तर में कई फोन आए जो कि आई ओ की ही भाषा बोल रहे थे और कन्वेंस करने की कोशिश कर रहे थे इससे यह तो स्पष्ट हो गया कि एडीजीपी रवि प्रकाश ने इसमें कोई दिलचस्पी नहीं ली और यह सिर्फ अपने नीचे वाले लोगों को बचाने का प्रयास था।

मैं न्याय की अपेक्षा करती रही लेकिन पुलिस की फाइल इधर से उधर होती रही। मुझे पता चला मेरी फाइल 4 मई 2022 को आलोक सैनी एसीपी वैशाली नगर को ट्रांसफर कर दी गई।

आलोक सैनी को भी मैंने पूरे साक्ष्य दिए साथ ही मुझसे दोबारा पूछताछ की गई हुए। मोनिका ने अपने स्तर पर जांच की, तो पता चला की बहुत कुछ इस फाइल से गायब है। आलोक सैनी द्वारा की गई कोई भी इन्वेस्टिगेशन इस फाइल में दिखाई नहीं पड़ रही है किसी भी अधिकारी ने न तो इन सभी के बैंक अकाउंट फ्रीज किए नाही पासपोर्ट जप्त किया यदि वह देश छोड़कर भाग जाते हैं तो मेरे पास पैसे कौन दिलाएगा पुलिस प्रशासन या सरकार..?

मोनिका ने मीडिया को आगे बताया चार्जशीट में साक्ष्य के तौर पर दिए गए बैंक स्टेटमेंट से पता चलता है कि यह वित्तीय घोटाला विकास शर्मा, सतीश शर्मा (विकास के पिता), हरीश शर्मा (विकास का भाई) और लीना शर्मा (विकास की पत्नी) के संचालन में हो रहा है कई ट्रांजैक्शन से यह भी प्रतीत होता है कि इसमें कई प्राइवेट फाइनेंस कंपनियां भी शामिल हैं ।

गौरतलब है कि आरोपी विकास सतीश शर्मा की पत्नी लीना शर्मा भी आईसीआईसीआई बैंक में है और धन शोधन/धोखाधड़ी के समान कार्य कर रही हैं, पुलिस ने उनके बैंक खातों की भी जांच नहीं की और उन्हें भी गवाह बना दिया। अब सवाल यह उठता है कि आरोपी गवाह कैसे बन सकता है..? क्या इन सब की मिलीभगत है...? अगर नीचे से ऊपर तक के सभी वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी जानकारी थी तो अब तक सहायता क्यों नहीं की गई..? मोनिका ने रूआंसा होते हुए मीडिया को बताया की मैं 27 दिसंबर को वर्तमान डीजीपी उमेश मिश्रा से भी मिल चुकी हूं उनसे रिक्वेस्ट की है कि मेरी फाइल एस ओ जी को ट्रांसफर कर दी जाए क्योंकि फाइनेंसियल स्कैम को इन्वेस्टिगेट करने के लिए एसओजी टीम पूर्ण निपुण होती है। राजस्थान राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रेहाना रियाज़ जी द्वारा भी मेरी शिकायत पत्र को दो बार डीजीपी उमेश मिश्रा और एडीजीपी रवि प्रकाश तक पहुंचाया गया ।

इसके बाद भी मैंने पुलिस के वरिष्ठ अधिकारयों को पत्र द्वारा सूचित किया एवम राजस्थान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से भी मदद की मांग करी है। राजस्थान सरकार के शासनकाल में महिलाओं के खिलाफ किसी भी अपराध के लिए कड़ी और सख्त कार्रवाई की गई है। महिलाओं की सुरक्षा, सशक्तिकरण पर बहुत महत्व दिया गया है, में भी तो इस देश की बेटी हूँ क्या राजस्थान सरकार मुझे न्याय देने में सक्षम है?

मेरी लड़ने और सहने की शक्ति अब ख़तम हो चुकी है यहाँ तक की मैं अपना मानसिक संतुलन खोती जा रही हूँ , यदि राजस्थान सरकार अब भी मेरी कोई मदद नहीं करती है तो मेरे पास सिवाय आत्महत्या करने के अलावा कोई चारा नहीं है।

















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