धनु लग्न में नववर्ष के प्रवेश से विश्व में बढ़ेगी भारत की साख
- A1 Raj
- 7 अप्रैल 2024
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जयपुुर 7 अप्रैल2024 राजकीय महाराज आचार्य संस्कृत महाविद्यालय में हुआ पंचांग लोकार्पण
– धर्माचार्यों एवं ज्योतिषियों ने संवत् 2081 के व्रत-पर्वों पर की चर्चा की।

जयपुुर भारतीय कैलेंडर अनुसार इस बार विक्रम् संवत् 2081 का प्रवेश धनु लग्न में होने जा रहा है। इस वर्ष विश्व में राजनैतिक स्थिरता के साथ औद्योगिक एवं विदेश नीति में अहम फैसले लिए जायेंगे और विश्व में भारत की साख बढ़ेगी। किन्तु वर्ष का राजा मंगल व मंत्री शनि तृतीय भाव में एक साथ बैठकर शासन तंत्र के लिए दुविधा जनक स्थिति के संकेत दे रहे है। शनिवार को यहां राजकीय महाराज आचार्य संस्कृत महाविद्यालय में पंचांग लोकार्पण किया गया। साथ ही धर्मसभा, पंचांग श्रवण और वसंत संपात चर्चा भी की गई।
कार्यक्रम के आयोजक और राजकीय महाराज आचार्य संस्कृत महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. शालिनी सक्सेना ने कहा कि प्रकृति में परिवर्तन के साथ ही भारतीय संवत्सर का भी परिवर्तन हो रहा है। 09 अप्रैल 2024, मंगलवार, चैत्रषुक्ल प्रतिपदा को कालयुक्त नामक संवत्सर का प्रारंभ हो रहा है। यह भारतीय कालगणना का 2081वां विक्रम् संवत् है। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि हाथोज धाम के महंत बालमुकुंदाचार्य ने कहा कि पंचांग भारतीय परंपरा का वैज्ञानिक दृष्टि से निर्वाह का उदाहरण है पंचांग श्रवण की भारतीय परंपरा का संरक्षण आवश्यक है, विशिष्ट अतिथि गलता पीठ के श्री गलता पीठ के श्री गालव आश्रम के युवाचार्य श्री राघवेंद्र आचार्य जी महाराज, कार्यक्रम के अध्यक्ष संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो विनोद शास्त्री ने कहा कि विक्रम संवत भारत का प्राचीनतम संवत है और विक्रमादित्य के शासनकाल से इसका प्रचलन हुआ था विक्रमादित्य का राज्य राम राज्य का प्रतीक था अतः भारत में विक्रम संवत की परंपरा से पंचांग प्रचलन की परंपरा आज तक प्रचलित है। पूर्व संस्कृत निदेशक भास्कर शर्मा भी उपस्थित रहे ।

इस वर्ष इन संभावनाओं पर हुई चर्चा –
इस अवसर पर धर्माचार्यों एवं ज्योतिषियों ने संवत् 2081 के व्रत-पर्वों पर चर्चा की एवं लोक परम्परा के अनुसार पंचांग-वाचन करते हुए विभिन्न विषयों पर मंथन किया।
पंचांग के संपादक डॉ. रवि शर्मा और डॉ. आलोक शर्मा ने कहा कि विक्रम् संवत् 2081 का प्रवेष चैत्रकृष्ण अमावस्या, सोमवार, दिनांक 08 अप्रैल 2024 को रात्रि 11ः51 पर रेवती नक्षत्र एवं वैधृति योग में धनुलग्न में होने जा रहा है। धनु लग्न का स्वामी गुरु पंचम भाव में राज्येश बुध के साथ बैठकर लग्न को पूर्ण दृष्टि से देख रहा हैं। जो विश्व में भारत की साख बढ़ाने में विशेष सहायक बनेगा। राजनैतिक स्थिरता के साथ औद्योगिक एवं विदेश नीति में अहम फैसले लिए जायेंगे। किन्तु वर्ष का राजा मंगल व मंत्री शनि तृतीय भाव में एक साथ बैठकर शासन तंत्र के लिए दुविधा जनक स्थिति के संकेत दे रहे है। कुछ प्रांतों में उग्रवाद, आतंकवाद सांप्रदायिक उपद्रवों से जन मानस पीड़ित रहेगा। वर्ष के शुरु में भारत में होने वाले लोकसभा चुनावों में सत्तापक्ष और विपक्षी गठबंधन के बीच विषैले भाषणों से देश का वातावरण आक्रोश के साथ अशांति वाला बनेगा। साथ ही मंगल शनि का यह योग यूरोपीय देशों व चीन, पाकिस्तान के लिए भी अशांति या युद्धादि भय का संकेत दे रहा है। चतुर्थ भाव में ष्पंचग्रही योगष् पशुधन व किसानों के लिए कष्टकारक साबित होगा।







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