डॉ. रेणु शाही के छत्तीस मिनट में बने चित्र के भाव
- A1 Raj
- 11 मार्च 2024
- 2 मिनट पठन
यदि एक कलाकार अपनी जड़ों से जुड़ा रहाता है तो स्वाभाविक एवं सरल होता है जो उसकी कला में भी दिखाता है l जब बात कला की, की जाय तो उसमें कलात्मक अभिव्यक्ति ही महत्त्वपूर्ण होती है l

चित्रकार डॉ. रेणु शाही का कहाना है कि कवि, साहित्यकार चित्रकार आदि अनेक उपमाओं से अलंकृत गुरु रबीन्द्रनाथ टैगोर ने कला को "अभिव्यक्ति" कहा है l

इसी कथन को सार्थक करती इनकी यह "काशी" नामक चित्रकृति है, जो केवल छत्तीस मिनट में बनाई गई है l काग़ज़ पर यैक्रेलीक रंग से बना यह चित्र एक आधुनिक संयोजन है जो क्षणिक व स्वाभाविक कला के रूप को दिखाता है l

इसे बहुत से कला ज्ञानियों द्वारा इसे स्वीकार करना भी आसाना नहीं था परंतु सबके अपने- अपने रस बोध एवं दृष्टीकोण होते है l

इसलिए कुछ कला विद्वानों द्वारा उसे सराहना भी मिली और यह सांत्वना पुरस्कार प्राप्त करने में सफल रही l
कलाकार का कहाना है कि वो अपणे भवों को ही चित्र मे प्रस्तुत करती है l उन्हें चित्र रचना करने के लिए कहीं से नकल करने या अधिक समय लगाने की जरूरत नहीं पड़ती है l जो उनके अंतर्मन में है उसी को चित्र धरातल पर अंकित कर देती है l

इसका कारण उनका काशी से गहरा संबंध होना है l जहां से उन्होंने अपनी कला शिक्षा पूर्ण की है l आज भी गंगा का किनारा उन्हें अपनी ओर खींचता है जिस भाव को वो चित्रों के माध्यम से दिखती है l

हाल ही में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर सात से नौ मार्च तक राजस्थान ललित कला अकादमी में अतिशय कलीत संस्थान द्वारा राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी का आयोजन किया गया l जिसके समापन समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप मे राजस्थान विश्विद्यालय के संगीत विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. माया रानी टॉक के द्वारा विजेताओं को पुरस्कृत किया गया l




























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