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डॉक्टर रेणु शाही के चित्रों के गुण उन्हीं के शब्दों में....

  • लेखक की तस्वीर: A1 Raj
    A1 Raj
  • 25 जन॰ 2024
  • 3 मिनट पठन

"डॉ. रेणु शाही ने बताये गीता के चौदहवें अध्याय का महत्व

उन्हीं के शब्दों में.....

मैं डॉ. रेणु शाही, नाम के आगे डॉक्टर लगाने तक का ये सफर बहुत ही तपस्यारत और संघर्षपूर्ण रहा है l कुछ बातों को छोड़ दिया जाय तो आज भी जीवन में समस्याओं और कठिनाइयों को दौर चलता ही रहता है l परंतु इनसे उबरने का एक ही रास्ता है l ईश्वर की भक्ती एवं परिश्रम l



ऐसा नहीं कि एक 2 divisional से Ph. D. तक की उपाधि पाना कोई विशेष योग्यता है l लेकिन मेरे लिए विशेष इसलिए है कि एक उपेक्षित जीवन होने के बाद यह सब मेरे संदर्भ में एक बड़ी बात है

l इस सबके पीछे मैं अपनी आध्यात्मिक चेतना को कारक मानतीं हूँ l और अपने परिवार की कृतज्ञ भी हूँ , जहां से मुझे आध्यात्मिक ज्ञान मिलाता रहा l दादी, नाना-नानी, माँ - पिता जी संयोग से सभी कहानियों एवं धार्मिक अनुष्ठानों में मानवता एवं नैतिकता का पाठ हमेशा पढ़ाते रहे l मेरी माँ (श्रीमति चित्र रेखा) की कहानियो ने मुझे सबसे ज्यादा प्रभावित किया l जिससे मुझे देव, दानव, राक्षस और मनुष्य के विचार एवं स्वभाव का अन्तर पता चला l



एक समय के पाश्चात्य जिज्ञासावश स्वयं से ही धार्मिक ग्रंथों को पढ़ने के रुचि बढ़ती गयी l इसी क्रम में जब मुझे कला विषय का विद्यार्थी होने का अवसर मिला तो मैंने "पौराणिक ग्रंथों के आख्यानों एवं चित्रकला" विषय पर शोध कार्य किया l अध्ययन के उपरांत एक समय के बाद कला आचार्य के रूप में कार्य करते-करते चित्रकारी छूट सी गई l परंतु जब मुझे 2 वर्ष पहले 'श्रीमद्भागवतगीता ' में उपाधि करने का अवसर मिला तो मैं और पिता जी (श्री जय चंद शाही) दोनों ने बड़ी ही उत्सुकता एवं उत्साह के साथ सत्र को सुनने लगे l

यह एक online course था I जो ISKCON अयोध्या के तरफ से आयोजित किया जा रहा था l जिसमे प्रभु देवशेखर के समान्य, सरल एवं सहज प्रवचन सबसे अधिक प्रभावित करने वाले थे l उनके उदाहरणार्थ दिए गए भौतिक जीवन की बाते सबसे अधिक और अच्छी तरह समझ मे आते थे l यही से मुझे प्रकृत के तीन गुणों के बारे मे अधिक स्पष्ट रूप से जानने का मौका मिला l और मैंने उनपर चित्रण करने की प्रेरणा ली l

यह तीनों प्रकृति के गुण मानव के स्वभाव का निर्धारण करते है l जो सत्वगुण, रजोगुण, तमोगुण हैं l सामान्य अर्थों में तीनों गुणों के अधीन मनुष्य का व्यव्हार प्रभावित होता है इनका विस्तार से उल्लेख "श्रीमद्भागवत गीता" अध्याय चौदह के श्लोक संख्या 6 , 13 और 14 में किया गया है l लेकिन प्रसंगवश कई स्थानों पर दिखने को मिलता है l इसे सरलतम रूप में इस प्रकार समझा जा सकता है l ......

1. सत्वगुण में मनुष्य सात्विक विचारो वाला होता है l ऐसे मनुष्य अहिंसा प्रेमी, धार्मिक, परहित करने वाला, सात्त्विक भोजन ग्रहण करने वाला ईश्वर की सेवा व भक्ति में लगा रहने वाला तथा परोपकारी होता है l





सत्वगुण के प्रतिनिधि देवता विष्णु जी है l जिनको मैंने अपने चित्र में प्रतीकात्मक रूप में वैष्णव तिलक के माध्यम से दिखाने का प्रयास किया है l चित्र में शांत व सात्विक भाव को दिखाने के लिए नीले व श्वेत रंग का प्रयोग किया है जो विष्णु से ही संबंधित हैं l

2. रजोगुण वाला मनुष्य ईश्वर की सेवा के साथ-साथ भौतिकवादी एवं राजसी जीवनी का इच्छुक, क्रोध करने तथा क्षत्रिय गुणों वाला होता है I



रजोगुण के प्रतिनिधि देवता ब्रह्मा जी है l जिनका तिलक शिव के त्रिपुण्ड से मिलता है l इस चित्र में पीले और लाल रंग का प्रयोग किया गया है l जो ताप को एवम राजसी भाव के साथ अध्यात्म का भी द्योतक है l यह राजसी विचारों को बढ़ाने में सहायक होता है l

3. तामसिकगुण वाला मनुष्य तामसिक भोजन, मांस - मदिरा का सेवन करने वाला, दुसरों का अहित करने वाले, लोभी, स्वार्थी, कामवासना से युक्त तथा शूद्र बुद्धी वाला होता है l



तमस के प्रतिनिधि देव शंकर ( शिव जी ) है l काला वर्ण तमस का होता हैं l चित्र में काले व स्वेत के मिश्रण से रहस्य को परिभाषित किया गया है l शिव के त्रिपुण्ड में त्रिनेत्र क्रोध का प्रतीक है l तामसिक विचारों वाले मनुष्य किसी को पराजित करने में श्रेष्ठता का अनुभव करते है तथा अहंकार से युक्त होते है l

निष्कर्ष स्वरूप यह कहा जा सकता है l इस मृत्यु जगत में तीनों गुणों से युक्त जीव है l समान्य परिस्थियों में किसी एक व्यक्ति में किसी एक गुण की प्रधानता रहती है l लेकिन जीव को प्रयास करना चाहिए कि वो भक्ति का मार्ग लेकर अपने आप को मोक्ष की ओर अग्रसर करें l क्योंकि शाश्वत सत्य यही है l मृत्यु तो आनी है चाहे कुछ भी कर लो l इसलिए शुद्ध गुणों को धारण करते हुए आध्यात्मिक जीवन को ग्रहण किया जाय और दुसरों के लिए शुद्ध विचार रखा जाए l इसी में सबका कल्याण है l

आलेख : डॉ. रेणु शाही

कला आचार्य, चित्रकार एवं कला समीक्षक, जयपुर ( राजस्थान)

 
 
 

3 टिप्पणियां


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26 जन॰ 2024

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