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घट यात्रा में किया नगर भ्रमण


श्री सिद्ध चक्र विधान से कष्टों से मुक्ति, अगले जन्म में शुभ ही शुभ…. आचार्य शशांक सागर


घट यात्रा में किया नगर भ्रमण




वरूण पथ स्थित श्री दिगंबर जैन मंदिर में अष्ठानिका के प्रथम दिवस पर आयोजित घट यात्रा में आचार्य शशांक सागर जी महाराज के सान्निध्य में नगर भ्रमण किया गया।


इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भगवान महावीर के जयकारों और प्रसिद्ध भजनों, जैसे “जैन धर्म के हीरे मोती”, “महावीर की सुंदर मूरत लागे मने प्यारी” से पूरा शहर गूँजायमान कर दिया। नगर के विभिन्न स्थानों पर आचार्य श्री के पाद प्रक्षालन और आरती का आयोजन किया गया।




बैंड बाजे के साथ जुलूस में महिलाएं पीत वस्त्रों में सिर पर कलश रखकर तथा पुरुष श्वेत वस्त्रों में भाग ले रहे थे।



समिति अध्यक्ष एम. पी. जैन ने बताया कि झण्डा रोहण प्राचार्य डॉ. शीतल चंद जैन और अखण्ड दीप प्रज्ज्वलन जय कुमार प्रभा जैन ने किया। इस अवसर पर नगर निगम के चेयरमैन पारस जैन का स्वागत भी किया गया।



सौधर्म इन्द्र सुनील और अनीता गंगवाल ने बताया कि आचार्य श्री ने अपने प्रवचन में श्री सिद्ध चक्र विधान के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इस विधान से सभी प्रकार के कष्ट दूर होते हैं और प्रत्येक व्यक्ति को इसे जीवन में एक बार अवश्य करना चाहिए, जिससे न केवल वर्तमान जीवन सुधरता है, बल्कि आगामी भव भी शुभ ही शुभ होगा है।



भास्करेन्द्र सतीश जैन ने बताया प्रतिष्ठाचार्य प्रदुम्न शास्त्री ने मंत्रोच्चार कर मण्डल शुद्धि के साथ प्रथम वलय की पूजा करवाई ।




सांय आरती के साथ भक्ति संध्या का आयोजन हुआ।

प्रतिदिन प्रातः अभिषेक, शांतिधारा, विधान के साथ आरती होगी।





9 से 15 नव. को प्रतिदिन प्रातः 8:00 बजे से विधान प्रारंभ होगा । अंतिम चरण दिनांक 16 नव. को नित्य अभिषेक के साथ विश्व शांति महायज्ञ होगा।



 
 
 

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