काशी में हुआ आयुर्वेद के अतीत,वर्तमान और भविष्य पर चिंतन
- A1 Raj
- 17 मई 2023
- 2 मिनट पठन
धर्म और ज्ञान की नगरी वाराणसी में आयुर्वेद के देशव्यापी संगठन विश्व आयुर्वेद परिषद का दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन संपन्न हुआ।
विश्व आयुर्वेद परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रोफेसर डॉ गोविंद सहाय शुक्ल ने बताया कि उद्घाटन सत्र में उत्तरप्रदेश सरकार के माननीय आयुष मंत्री दयाशंकर दयालु ने कहा की आयुर्वेद ऐसी चिकित्सा विधा है जो व्यक्ति के स्वास्थ्य के संरक्षण के साथ निरापद चिकित्सा देती है। महंगी एलोपैथी दवाओं से लोगों के घर बिक जाते हैं जमीन गिरवी हो जाती है, लेकिन किसी वैद्य की चिकत्सा से ऐसा नहीं होता है। समाज को जागरूक करने की आवश्यकता है की शतायु जीवन के लिए आयुर्वेद के जीवन सिद्धांतो की पालना करनी चाहिए।

इस अवसर पर परिषद ने केंद्र सरकार को प्रत्येक राज्य में एक राष्ट्रीय आयुर्वेद शिक्षण एवम् शोध संस्थान खोलने तथा आयुर्वेद को राष्ट्रीय चिकित्सा पद्धति घोषित करने के दो प्रस्ताव भेजने का निर्णय लिया।

प्रोफेसर शुक्ल ने बताया कि अधिवेशन में 20 प्रांतों से 160 से अधिक आयुर्वेद के विद्वानों की सहभागिता रही।
अधिवेशन में सामूहिक सत्रों के अतिरिक्त विभिन्न क्षेत्र अनुसार एवं शिक्षक प्रकोष्ठ, चिकित्सक प्रकोष्ठ, महिला प्रकोष्ठ, विद्यार्थी प्रकोष्ठ, अनुसंधान प्रकोष्ठ की बैठकों का आयोजन किया गया।

विश्व आयुर्वेद परिषद वर्तमान में शिक्षकों, चिकित्सकों, विद्यार्थियों,औषध निर्माताओं, अनुसंधान एवं सेवा के क्षैत्र में 25 वर्षों से कार्य कर रहा है। चिकित्सक, विद्यार्थी, शिक्षक आयुर्वेद की विभिन्न प्राचीन विधाओं में कौशल युक्त हो एवं समाज सेवा में आगे आकर सेवा भाव के साथ कार्य कर सके इस हेतु प्रयासरत है।

अधिवेशन में प्रोफेसर योगेश चन्द्र मिश्र, प्रोफेसर महेश व्यास, प्रोफेसर अश्विनी भार्गव, प्रोफेसर कमलेश कुमार द्विवेदी, डॉ सुरेन्द्र चौधरी, डॉ राम तीर्थ शर्मा, डॉ किशोरी लाल शर्मा उपस्थित रहे।

राजस्थान प्रदेश से 8 आयुर्वेद शिक्षक, वरिष्ठ आयुर्वेद चिकित्सकों ने भाग लिया। जिसमें डॉ रामवतार शर्मा, डॉ निरंजन गौतम, डॉ विनोद कुमार गौतम, डॉ नेमसिंह राजपुरोहित, डॉ महेश इन्द्रा, डॉ संजय नागर की सहभागिता रही।







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