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आयाम, गांव के सुगंध को बचाने का प्रयास" साभार: डॉ. रेणु शाही (कलाआचार्य, चित्रकार और कला समीक्षक, जयपुर)

  • लेखक की तस्वीर: A1 Raj
    A1 Raj
  • 28 फ़र॰ 2025
  • 2 मिनट पठन

"आयाम, गांव के सुगंध को बचाने का प्रयास"

साभार: डॉ. रेणु शाही (कलाआचार्य, चित्रकार और कला समीक्षक, जयपुर)


अभी हाल ही में जयपुर स्थित राजस्थान इण्टरनेशनल सेंटर पर कलाविद प्रो. चिन्मय मेहता से मिलना हुआ, जहा मुझे उनके संस्थान आयाम के बारे में पता चला।

"आयाम, गांव के सुगंध को बचाने का प्रयास"
"आयाम, गांव के सुगंध को बचाने का प्रयास"

साभार: डॉ. रेणु शाही (कलाआचार्य, चित्रकार और कला समीक्षक, जयपुर)

उन्होंने बताया कि वह एक कलादीर्घा बना रहे है जो राजस्थान के ग्रामीण अंचल की कला को बढ़ावा देने का कार्य करेगी। देखा जाए तो यह चिंता जनक है कि तीन दशक पहले कला प्रेमी और पर्यटक रणथम्भौर के गाँवों की मिट्‌टी की दीवारों पर चित्रित मांडनाओं की फोटो खींचते थकते नहीं थे

किन्तु जब से सरकार ने उन्हें सीमेंट के घर दिए हैं, यह परम्परा अब विलुप्त होने के कगार पर है क्योंकि ग्रामीण महिला चित्रकारों को बस गोबर व मिट्‌टी की दीवारों पर सस्ते खनिज मिट्‌टी के रंगों हिरमिच, पीली और सफेद मिट्‌टी से ही मांडना बनाना आता था।

परंतु प्रो. मेहता (जो की स्वयं एक चित्रकार और वास्तुकार है ) की "आयाम" कला एवं संस्कृति संस्थान के प्रयासों द्वारा रणथम्भौर की तेजी से लुप्त होती आदिम मांडना कला को पुनर्जीवित करने हेतु प्रयास किया जा रहा है।

प्रो. चिन्मय ने बताया कि इस योजना के अंतर्गत महिला चित्रकारों को वैकल्पिक सतहों पर प्रशिक्षण देकर उन्हें दीर्घकालिक आजीविका प्रदान करने के लिए कौशल विकास कार्यशालाएँ भीआयोजित की जाति रही है। जिसमे सबसे पहले दीवारों के मांडनाओं को सांगानेरी हैण्ड मेड शीट पर चित्रित करना सिखाता है तथा उसके बाद महिला चित्रकार सीमेंट की पक्की दीवारों पर भी नए रंगों से चित्र बनाना सीखती है।

इसी को प्रसारित करने के क्रम में पहली बार जयपुर में आयाम कला दीर्घा द्वारा मांडना कला व संस्कृति संस्थान के हितकर्ताओं के लिए प्रदर्शनी और कार्यशाला के आयोजन के लिए जवाहर नगर में एक दीर्घा स्थापित की गई है। जिसका उद्घाटन सताइस फरवरी को मुख्य अतिथि एन. सी. गोयल (डायरेक्टर राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर, जयपुर) द्वारा किया गया l

इस अवसर पर शहर के कई कला प्रेमी और कलाकार जैसे आई.सी. श्रीवास्तव, ऋषि चतुर्वेदी, अनु सोगानी, डॉ. अमिता गोयल, डॉ. सुरेंद्र सोनी, महेश स्वामी, डॉ. रेणु शाही, किरण चतुर्वेदी, तिलोतम कुमार के साथ कला विधार्थी भी उपस्थित थे।

सभी ने गांवों से विलुप्त होती लोक कलाओं को बचने एवं बढ़ावा देने के विषय पर भी चर्चाएं की l

 
 
 

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