शिल्पी फाउंडेशन की ओर से पतंग महोत्सव मनाया गया
- A1 Raj
- 12 जन॰ 2023
- 2 मिनट पठन
अपडेट करने की तारीख: 13 जन॰ 2023
शिल्पी फाउंडेशन की ओर से पतंग महोत्सव मनाया गया। समाज कल्याण बोर्ड की अध्यक्ष अर्चना शर्मा पतंग महोत्सव की मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहीं।

आयोजक शिल्पी अग्रवाल ने बताया कि इस आयोजन में शहर की नामचीन महिलाओं ने पतंगबाजी का लुत्फ उठाया। कार्यक्रम संयोजिका शिल्पी अग्रवाल ने कहा कि पतंगों का त्योहार आपसी भाईचारे का पर्व है। इस कार्यक्रम में जहां सभी महिलाओं ने हिंदी गानों पर खूब डांस किया, वहीं कई महिलाओं ने अपनी सुरीली आवाज में गाने भी गाए. समाज कल्याण बोर्ड की अध्यक्ष अर्चना शर्मा ने भी पतंग उड़ाकर खूब लुत्फ उठाया, वहीं आई महिलाएं सहम गईं। तिल के लड्डू भी खिलाएं। पतंग महोत्सव में रिजवान अजाजी, विजय गर्ग, स्नेह भारद्वाज, मधु सोनी, कमलेश सोनी, सरोज अग्रवाल आदि महिलाओं ने भाग लिया।

कला-संस्कृति की नई पहचान शिल्पी फाउंडेशन
- जीवन में जब तकलीफ आती हैं तो अधिकतर लोग टूट जाते हैं, लेकिन शिल्पी फाउंडेशन की कर्ता-धर्ता शिल्पी अग्रवाल ने दुख में न केवल खुद को मजबूत बनाया, बल्कि समाजसेवा को हर दर्द का मरहम बना लिया। आज उनका संगठन कला-संस्कृति और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में मजबूती से काम कर रहा है...
आज जब समाज टूट रहे हैं, परंपराओं को विस्मृत किया जा रहा है, महिलाएं अपने रीति-रिवाजों से दूर हो रही हैं, बच्चे अपने बुजुर्गों की छांव नहीं पा रहे हैं, ऐसे में इन सब समस्याओं के समाधान के लिए जयपुर की एक संस्था सामने आई है। इसका नाम है शिल्पी फाउंडेशन। इस फाउंडेशन की संचालिका हैं शिल्पी अग्रवाल और उनके साथ काम कर रही है सौ महिलाओं की एक मजबूत टीम। फाउंडेशन का कार्यालय जयपुर के सोडाला के कटेवा नगर में है।

बकौल शिल्पी, फाउंडेशन की स्थापना 10 मई, 2014 को की गई थी। एक सदस्य से शुरू हुआ यह संगठन आज सैकड़ों महिलाओं को अपने साथ जोड़ चुका है। फाउंडेशन बनाने के उद्देश्य के बारे में उनका कहना है कि हमने पारंपरिक त्योहारों को नए तरीके से मनाने और लोगों को उनकी संस्कृति के बारे में समझाने के लिए संगठन बनाया है।

फाउंडेशन आठ सालों में सौ से अधिक कार्यक्रमों का आयोजन कर चुका है। इनमें परिंडा अभियान, पौधरोपण अभियान, पतंगबाजी उत्सव, फाग, गणगौर, तीज, करवाचौथ, जन्माष्टमी, गणेश चतुर्थी, महिला दिवस, मातृ दिवस, पितृ दिवस, महिला सम्मान समारोह, एकल बेटी सम्मान अभियान और जीवनसाथी बना सारथी जैसे कार्यक्रम शामिल हैं, जो हर साल आयोजित किए जाते हैं।

शिल्पी भविष्य में महिला सशक्तिकरण को समर्पित ऐसे कार्यक्रम का आयोजन करना चाहती हैं, जिसमें प्रदेशभर की विभिन्न क्षेत्रों की हुनरमंद महिलाओं को एक ही छत के नीचे सम्मानित किया जा सके। संगठन की आर्थिक स्थिति के सवाल पर उनका कहना है कि सभी के सहयोग से हर कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हो जाता है। कोई समस्या आती है तो सभी के सहयोग से उसका समाधान निकाल लिया जाता है।
शिल्पी अपने निजी जीवन के बारे में भावुक होते हुए कहती हैं कि शादी के बाद मुझे दहेज प्रताड़ना का सामना करना पड़ा था। इसके बाद मैंने डिवोर्स ले लिया। शिल्पी ने चार विषयों में स्नातकोत्तर की उपाधि हासिल की है। वे बताती हैं कि उन्हें मम्मी-पापा का पूरा सहयोग मिलता है। शिल्पी भविष्य में राजनीति के क्षेत्र में जाना चाहती हैं। इसके माध्यम से वह अपने समाज सेवा के दायरे को बढ़ाना चाहती हैं, जिसके लिए उन्होंने अपनी तैयारी भी शुरू कर दी है।





























































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