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शीला की भाभू के ठाकुर जी

  • लेखक की तस्वीर: A1 Raj
    A1 Raj
  • 1 फ़र॰ 2024
  • 2 मिनट पठन


भगवान राम कौन है यह जाना मैंने मेरी भाभू से बचपन में !भाभू - मेरी बड़ी नानी ,यानी मेरी मां की ताई जी !मेरे बड़े नाना जी का देहांत कम उम्र में ही हो गया था !भाभू बहुत बड़ी राम भक्त थी ।उन्होंने अपना पूरा जीवन भगवान राम की आराधना में बिता दिया ।



उन्होंने अयोध्या जाकर भगवान की आराधना की वही पूरा जीवन बिताया! अयोध्या को अयोध्या बोलती थी भाभू! कभी-कभी ही हम लोगों के साथ आकर रहती थी !

बहुत सात्विक और सरल हृदया, भगवान की सरल भाव से भक्ति करती थी! रात दिन बस राम नाम का जाप करती रहती थी! जो खुद कपड़े पहनती वही भगवान को पहनाती थी !जो खुद खाती वही भगवान को खिलाती थी और माथे पर चंदन का तिलक उनकी शोभा को और ज्यादा बढ़ाता था !मुख से हमेशा राम का जाप निकलता रहता था ।

मैंने पेंटिंग में उनकी मुख मुद्रा जाप करते हुए बनाने का प्रयास किया है और उनका सुमिरन करती हुई मुद्रा में उंगलियों में तुलसी की माला हाथ में दी है!उनकी अंतिम इच्छा भी यह थी कि उनका मृत्यु भोज ना करके अयोध्या के साधु संतों को भोजन करवाया जाए




भंडारा करके और मेरे ननिहाल वालों ने यह उनकी इच्छा पूरी भी की! जब भी अयोध्या का नाम आता है मुझे भाभू का "अजोध्या' जरूर याद आता है! मैंने उनसे ज्यादा बड़ा राम का भक्ति कोई नहीं देखा !जब राम की बात आती है तो सबसे पहले मेरे जेहन में भामू की याद ताजा हो जाती है!



यह आर्टवर्क मैं पेपरमेमेशी और स्क्रैप से बनाया है !भगवान राम कभी भी हनुमान जी के बिना नहीं रहते थे इसलिए मैंने साथ में हनुमान जी भी बनाए हैं जो की विनम्रता के भाव से झुके हुए हैं!

भाभू का भक्ति भाव पता चलने पर इस आर्ट इवेंट के आयोजकों ने मुझे यह बताया कि बाबू की यह पेंटिंग भाभू के' "अजोध्या" के पुराने राम मंदिर में लगवाई जाएगी! उनको मेरी यह श्रद्धांजलि भगवान ने सफल कर दी! जय हो भगवान राम जी की

 
 
 

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