रावणा राजपूत समाज का जयपुर में महापड़ाव
- A1 Raj
- 3 मार्च 2023
- 6 मिनट पठन
*रावणा राजपूत समाज का जयपुर में महापड़ाव*
*रणजीत सिंह सोडाला के नेतृत्व में उमड़ा जन सैलाब*
*सरकार से की विभिन्न मांगो को पूरा करने की मांग*
*जयपुर के मानसरोवर वीटी ग्राउंड पर जमा हुए हजारों लोग*
*विधानसभा घेराव का था कार्यक्रम, सरकार की तरफ से वार्ता के लिए आया बुलावा*
*रावणा राजपूत समाज के नेता और सरकार के बीच हुई सकारात्मक वार्ता*
*सरकार ने दिया 15 दिनों में मांगें पूरी करने का आश्वासन*
3 मार्च 2023, जयपुर। राजस्थान में आजादी से लेकर अब तक अपने मूलभूत अधिकारों के लिए सरकारों से गुहार लगा रहा रावणा राजपूत समाज अब उग्र आंदोलन की राह पर आने को मजबूर हो गया है। शुक्रवार को हजारों की संख्या में रावणा राजपूत समाज के लोग मानसरोवर के वीटी ग्राउंड पर इकट्ठा हुए और सरकार से विभिन्न मांगों को पूरा करने की मांग उठाई।

श्री अखिल रावणा राजपूत सेवा संस्थान के संयोजक रणजीत सिंह सोडाला ने बताया कि रावणा राजपूत, अन्य पिछड़ा वर्ग की अत्यंत पिछड़ी जाति है जिसका शासन प्रशासन में प्रतिनिधित्व लगभग नगण्य है। आजादी के बाद से अब तक सरकारें आती जाती रहीं, लेकिन रावणा राजपूत हमेशा उपेक्षा का शिकार ही रहा। शासन प्रशासन में प्रतिनिधित्व नहीं होने के कारण समाज की वाजिब और लोकतान्त्रिक मांगों को पूरा कराया जाना भी अब सम्भव नहीं हो रहा है।

सोडाला ने राजस्थान सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी हमारे समाज के साथ धोखा किया है। गहलोत सरकार एक तरफ विभिन्न जातियों के विकास हेतु अलग-अलग आयोग/बोर्ड बनाकर एक सकारात्मक सन्देश दे रही है, दूसरी तरफ रावणा राजपूतों की तरफ देख भी नहीं रही है।
इसलिए गहलोत सरकार की इसी हठधर्मिता के विरोध में 3 मार्च को समाज के करीब 25 हजार लोगों के साथ विधानसभा घेराव करने के लिए जयपुर में जमा हुए हैं।

*रावणा रावणा जाति की मांगे :*
1.रावणा राजपूत समाज सहित माली, कुम्हार, स्वामी, वैष्णव, दर्जी, नाई, जांगिड, घांची आदि कई अन्य अत्यन्त पिछड़ी जातियों को ओबीसी से अलग गुर्जर सहित पांच जातियों की तरह एक नया समूह “अत्यन्त पिछड़ा वर्ग” बनाकर अलग से आरक्षण दिया जाए।
2. रावणा राजपूत जाति के साथ जुड़े अलग-अलग मुगलकालीन नामों को हटाकार राजस्व रिकॉर्ड में एक नाम रावणा राजपूत किया जाए।
3. रावणा राजपूत समाज के कल्याण हेतु “मेजर दलपत सिंह रावणा राजपूत कल्याण बोर्ड” का गठन किया जाए।
4. हाईफा हीरो मेजर दलपत सिंह जी शेखावत “देवली” की शौर्यगाथा को विस्तृत रूप से राजस्थान के पाठ्यक्रम में विस्तृत रूप से शामिल किया जाए।
5. हाईफा हीरो मेजर दलपत सिंह जी शेखावत “देवली” के नाम से पाली जिले के देवली गाँव में पैनोरमा बना कर राजस्थान के एक पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किया जाए।
6. राजनितिक न्युक्तियों में रावणा राजपूत समाज को उचित प्रतिनिधित्व दिया जाए।
7. राज्य में जाति आधारित जनगणना कराई जाए।

रावणा राजपूत समाज की उपरोक्त मांगों के सन्दर्भ में क्रमवार निवेदन है कि रावणा राजपूत समाज सहित अत्यंत पिछड़े वर्ग की सामूहिक मांग रावणा राजपूत समाज सहित माली, कुम्हार, स्वामी, वैष्णव, दर्जी, नाई, जांगिड, घांची आदि कई अन्य अत्यन्त पिछड़ी जातियों को ओबीसी से अलग गुर्जर सहित पांच जातियों की तरह ही एक नया समूह “अत्यंत पिछड़ा वर्ग” बनाकर अलग से आरक्षण देने का निवेदन इसलिए किया जा रहा है क्योंकि मण्डल आयोग की सिफारिश और माननीय सर्वोच्च न्यायालय (मण्डल केस) के निर्णय अनुसार, राजस्थान में अन्य पिछड़ा वर्ग को 1993 से उनकी संख्या के आधे से भी कम मात्र 21% आरक्षण मिला। इस 21 प्रतिशत आरक्षण के समय अन्य पिछड़ा वर्ग की सूचि में मात्र 52 जातियां शामिल थी। जैसे-जैसे आरक्षण का महत्व समझ आया, वैसे-वैसे अन्य पिछड़ा वर्ग में कई जातियां और जोड़ दी गई, जिसकी संख्या 91 तक पहुँच गई लेकिन आरक्षण 21 प्रतिशत ही रहा।

जुलाई 2001 में अन्य पिछड़ा वर्ग के 21 प्रतिशत आरक्षण को तीन भागों में बाँटने की सिफारिश रणवीर सहाय वर्मा आयोग ने की लेकिन दुर्भाग्य से वह रिपोर्ट लागू नही हो पाई।

तत्पश्चात गुर्जर आरक्षण आन्दोलन की मांग को आपने स्वीकार करते हुए गुर्जर सहित पांच जातियों का अति पिछड़ा वर्ग बनाकर 5% अलग आरक्षण देने का साहसिक निर्णय किया। हाल ही में माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने ईडब्ल्यूएस आरक्षण को वैध मानकर आरक्षण की सीमा 50% को पार करने का रास्ता सरकारों के लिए खोल दिया है। चूँकि रावणा राजपूत समाज वास्तव में अलग से आरक्षण का हकदार है और आरक्षण की सीमा 50% वाली रुकावट भी अब नहीं रही। इसलिए हमारी मांग है कि रावणा राजपूत समाज सहित माली, कुम्हार, स्वामी, वैष्णव, दर्जी, नाई, जांगिड, घांची आदि कई अन्य अत्यंत पिछड़ी जातियों को ओबीसी से अलग गुर्जर सहित पांच जातियों की तरह ही एक नया समूह “अत्यंत पिछड़ा वर्ग” बनाकर अलग से आरक्षण देने हेतु राजस्थान राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग से अध्ययन करवा कर अलग से आरक्षण देने की कृपा कराएं।

इसी क्रम में दूसरा निवेदन है कि रावणा राजपूत जाति के साथ जुड़े अलग अलग मुगलकालीन पद नामों को हटाकार राजस्व रिकोर्ड में एक नाम रावणा राजपूत कराने का निवेदन इसलिए किया जा रहा है क्योंकि भारतीय संविधान ने अपने देश के सभी नागरिकों को सम्मान से जीवन यापन का अधिकार दिया है, लेकिन रावणा राजपूत जाति के साथ जुड़े मुगलकालीन पद नामों यथा “दरोगा, हजुरी, वजीर” आदि को अन्य समाजों की नजर में हेय दृष्टि से देखा जाता है और इन नामों के सम्बोधन को अपमान जनक महसूस किया जाता है। चूँकि अन्य समाज के ऐसे अपमानजनक नामों को हटाया जा चुका है या उनके सम्बोधन को अत्याचार की श्रेणी में रखकर कानून बनाकर उनको सुरक्षा प्रदान की गई है (जैसे अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति (अत्याचारण निवारण) अधिनियम 1989)। हमारा समाज ऐसे किसी कानून से सुरक्षा का अधिकारी होते हुए भी मात्र नाम संशोधन की मांग कर रहा है, जो कि राज्य सरकार के स्तर से किया जाना सम्भव है।

इसी क्रम में रावणा राजपूत समाज के कल्याण हेतु “मेजर दलपत सिंह रावणा राजपूत कल्याण बोर्ड” के गठन का निवेदन इसलिए किया गया है क्योंकि रावणा राजपूत समाज राजस्थान की प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र और प्रत्येक तहसील क्षेत्र में निवासरत है लेकिन इस समाज के लोग प्रधान, जिला प्रमुख, भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी या अन्य केन्द्रीय प्रशासनिक अधिकारी, राजस्थान प्रशानिक सेवा अधिकारी सेवा में बिलकुल शून्य है। शून्य प्रतिनिधित्व वाले जाति समाज के कल्याण का दायित्व माननीय सरकार का होता है। एक लोक कल्याणकारी सरकार अपने राज्य के सभी समाजों को उत्थान का अवसर प्रदान करे। इसी सन्दर्भ में आपकी सरकार ने इसी वर्ष विभिन्न जाति समाजो के कल्याण हेतु कई बोर्ड/आयोग का गठन किया है जैसे “विप्र फाउंडेशन, शिल्प एवम माटी कला बोर्ड, केश कला बोर्ड, महात्मा ज्योतिबा राव फुले बोर्ड, राजस्थान राज्य रजक (धोबी) कल्याण बोर्ड और राजस्थान चर्म शिल्प विकास बोर्ड आदि।“ इसी सन्दर्भ में रावणा राजपूत जाति के उत्थान हेतु “मेजर दलपत सिंह रावणा राजपूत कल्याण बोर्ड” के गठन का निवेदन है।

इसी क्रम में हाईफा हीरो मेजर दलपत सिंह जी शेखावत “देवली” की शौर्यगाथा को विस्तृत रूप से राजस्थान के पाठ्यक्रम में शामिल करने से राजस्थान के लोग मेजर साहब के शौर्य से परिचित होंगे। साथ ही अपने गौरवशाली इतिहास से आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा मिलेगी और युवा पीढ़ी अपने कर्तव्यपथ पर आगे बढ़ने का संकल्प। चूँकि इजरायल के पाठ्यक्रम में मेजर साहब की शौर्यगाथा को कक्षा 3 से कक्षा 5 तक लगातार तीन वर्ष विस्तृत रूप से पढ़ाया जा रहा है और उनके अपने देश और राज्य में उनके इतिहास को दबाया जाना न्यायोचित नहीं लग रहा है, अतः आपसे निवेदन है कि हाईफा हीरो मेजर दलपत सिंह जी शेखावत “देवली” की शौर्यगाथा को विस्तृत रूप से राजस्थान के पाठ्यक्रम में विस्तृत रूप सेर शामिल किया जाए।

इसी क्रम में हाईफा हीरो मेजर दलपत सिंह जी शेखावत “देवली” के नाम से पाली जिले के देवली गाँव में पैनोरमा बना कर राजस्थान के एक पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किए जाने राजस्थान का पर्यटक स्थल विकसित हो सकेगा और मेजर साहब के इतिहास से आने वाला प्रत्येक पर्यटक परिचित होगा। पर्यटक स्थलों के विकास से प्रदेश के राजस्व में भी बढ़ोतरी होगी और स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर भी उपलब्ध होंगे।

अतः आप से अनुरोध है कि आप हाईफा हीरो मेजर दलपत सिंह जी शेखावत “देवली” के नाम से पाली जिले के देवली गाँव में पैनोरमा बना कर राजस्थान के एक पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने का श्रम कराएं।

इसी क्रम में समाज की अन्य मांग है कि राज्य सरकार की राजनितिक न्युक्तियों में रावणा राजपूत समाज को उचित प्रतिनिधित्व दिया जावे। चूँकि रावणा राजपूत सामज का राजनीती में प्रतिनिधित्व भी नगण्य ही है और यह समाज ऐतिहासिक रूप से भी कर्तव्यनिष्ठ और वफादार रहा है। यदि सरकार राजनीतिक नियुक्तियों में रावणा राजपूत को अवसर देती है तो यह सरकार के साथ साथ राज्य के लिए भी उचित एवम हितकारी साबित होगा।

जैसा कि सर्वविदित है कि हाल ही के दिनों में माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तरप्रदेश निकाय चुनाव में इम्पेरिकल डेटा के अभाव में ओबीसी आरक्षण पर रोक लगाकर बिना ओबीसी आरक्षण के ही निकाय चुनाव करवाने का फैसला दिया है। ठीक यही घटनाक्रम पिछले दिनों मध्य प्रदेश सहित अन्य कई राज्यों में हुआ है। इसलिए हमारी मांग है कि सभी जातियों की गिनती सरकार के स्तर पर की जाकर सार्वजनिक की जावे। जातीय गणना से राज्य की सभी जातियों की वास्तविक स्थिति और उसके कल्याण एवम प्रतिनिधित्व हेतु योजना बनाने में आसानी होगी। इसलिए आप श्रीमान से राजस्थान में जाति जनगणना करवाने का निवेदन है।

हमें आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि आप हमारे रावणा राजपूत समाज की उपरोक्त मांगो पर सहानुभूति पूर्वक विचार कर जल्दी ही उचित निर्णय करेंगे।







टिप्पणियां